Banking: Licence to Manipulate ! बैंक लाइसेन्स या कानूनन घपलेबाजी !

भारत में 1969 के पहले मे प्राइवेट बिजनेस समुहो को बैंक लाइसेन्स दिया गया था जिसके स्वरुप 1969 तक यह देखा गया कि यह निजी बिजनेस समुह बैंकों का पैसा अपने फायदे के लिए उपयोग किया करते थे ना कि आम जनता को फायदा पहुचाने केलिए सस्ते दर पर लोन एवं सामाजिक अर्थव्यवस्था को बनाने मे, तत्पश्चात 1969 मे ईन प्राइवेट हाथों से ईन बैंकों को सर्कार ने ले लिया और बैंकों को मजबूती से सामाजिक प्रगति के लिए उपयोग किया गया, 1981 मे बचे हुए कुछ और बैंकों को भी इंदिरा गांधी सर्कार ने निजी कंपनियों के हाथों से लेकर सरकारी बना दिया गया जिससे सामाजिक प्रगति को और बल मिला.
1990 में भी अगर ICICI HDFC जैसे प्राइवेट बैंकों को लाइसेन्स दिया गया तो भी यह ध्यान रखा गया की यह लाइसेन्स उद्योगपति समुह को ना देकर प्रोफेशनल लोगों को ईन प्राइवेट बैंकों का प्रबंधन मिले जो अंतराष्ट्रीय स्तर की बैंकिंग सेवाएं भारत में ला सके, भारत की उद्योग प्रगति मे सहायता कर सके, ना की ऐसा माहौल बने 1969 से पहले वाला जब उद्योग घराने बैंकों के पैसों को सिर्फ अपने फायदे के लिए खर्च करते थे
लेकिन अब मोदी सर्कार के अंतर्गत ये बाते सामने आ रही है की मोदी सर्कार उद्योगपति को बैंक लाइसेन्स देना चाहती है और यह कहा जा रहा है की रिजर्व बैंक की INTER ADVISORY GROUP जिसमें 8 लोगों की सदस्या है ने इसका प्रस्ताव किया है सर्कार को, तो पहले आप को बता देना आवश्यक हे की इस 8 प्रोफेशनल्स के ग्रुप मे सिर्फ 1 मेंबर ने इस विचार पर हामी भरी है ब्लकि 7 मेंबर्स ने इसका विरोध किया है, तो यह कहना सरासर गलत होगा की RBI की इस ग्रुप ने उद्योग पतियों को बैंक लाइसेन्स देने की प्रस्तावना करी है, जोकि मीडिया मे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है
दूसरी बात यह है कि उद्योगपति को बैंक लाइसेन्स देना क्यों नहीं देना चाहिए इस विषय मे भारत के RBI गवर्नर्स रहे रघु राम राजन एवं विरल आचार्य का भी बाकी RBI ग्रुप के 7 सलाहकार सदस्यों की तरह ये मानना हे की निम्नलिखित वजहों से यह करना उचित नहीं है मोदी सर्कार द्वारा
1. बैंक के पैसों सिर्फ अपने फायदे के लिए खर्च किया जाएगा उद्योग पतियों द्वारा अगर उन्हें लाइसेन्स मिला
2. सामाजिक प्रगति के कार्यो की अवहेलना होगी
3. जनता के बैंकों मे जमा पैसों को गलत तरीके से उद्योगपति द्वारा आवंटित किया जाएंगे
4. ज्यादा से ज्यादा बैंक डूबेगे
5. उद्योगपतियों द्वारा राजनीतिक दबाव ज्यादा बढ़ेगा अगर देश की पूरी अर्थव्यवस्था ही बैंकों के रूप मे दे दीं जाएंगी उनके हाथों में
6. सामाजिक तबकों के विकास की अवहेलना खुलेआम होगी
7. बैंक सर्विस चार्ज बहोत बढ़ेंगे
8. तब RBI का कंट्रोल उन बैंक पर नहीं बल्की उन बैंकों का कंट्रोल होगा RBI पर
9. उद्योग जगत का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय करप्शन ऐसा बढ़ेगा जिसे जानना और लगाम लगाना ही मुश्किल होगा

अब चाहे बैंकों और उद्योगपतियों के विलय से हुए भारत मे हुए अर्थव्यवस्था से हुए नुकसान के इतिहास को देखा जाए या ताजातरीन YES BANK, PMCBANK DHFL ILFS फ्रॉड को देखा जाए, हुए तो उद्योगपतियों के घालमेल से हे फिर भी मोदी सर्कार Ambani Bank, Adani Bank बनाने मे इतनी उत्सुकता क्यों दिखा रही है यह तो प्रधानमंत्री मोदी ही बता दे जनता को तभी बेहतर होगा

Yash Singh
Guest Columnist
Economist & Investment-Banker
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अन्तरजाल का महाजाल

2014 से बहोत बड़ा अन्तरजाल चल रहा है, साफ प्रतीत होता है भारत में, जिसे कुछ लोगों का ग्रुप चला रहा है जिसमें ज्यादा से ज्यादा 4 लोग, 2 राजनीतिक और 2 व्यापारी शामिल लगते है |
ईन चारों की चौकड़ी ने कुछ मज़े हुए ज्यादा से ज्यादा 8-10 लोगों की टीम बना रखी है जिनमे 1-2 रिटायर्ड अव्वल दर्जे के रह चुके नौकरशाह,1-2 कानून क्षेत्र के लोग, 1-2 बैंकर, 4-5 रक्षा/मीडिया/पब्लिकरिलेशन/टेक्नोलॉजी के शामिल है, जिनका काम अपने 4 आकाओं के गुट की जरूरत के हिसाब की या अपने तरफ से कोई नई,अभेद रणनीति बना कर देना होता है जिसे किसी भी दाव पेच से परास्त ना किया जा सके | ईन 8-10 लोगों की टीम की प्रस्तुति सुन कर, और प्रश्न उत्तर कर कर तब ईन 4 आकाओं द्वारा फाइनल किया जाता है |

क्या यह 2016 से शुरू हुई हर 6 महीने के अन्तराल में घटित घटनाये अंधे को भी प्रमाण नहीं दिखा सकती?

हर 6 महीने मे जनता पर 1 बड़ी चोट क्या बीना प्लानिंग के संभव है?
सत्य है खुद देख लीजिए

Vijay Malaya Scam, March 2016

जनता के 9500 करोड़ का घोटाला कर राज्य सभा में अरुण जेटली से मिलने के बाद माल्या का आराम से भारत की रक्षा एजेंसियों को चकमा दे आराम से अचानक निकल जाना मार्च 2016

DEMONETISATION / नोटबंदी, November 2016

नवंबर 2016 रात 8 बजे अचानक नोट बंदी की घटना जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया, बैंकों को नोटों से भर दीया और लोगों को कंगाली मे जिने पर मजबूर कर दीया और जिसका फायदा कुछ ना हुआ ब्लकि नुकसान हुआ देश को

Goods & Services Tax, July 2017

जुलाई 2017 – GST जिसने छोटे और मझोले उद्योगों को बर्बाद कर दीया

PNB Scam, Nirav Modi Scam,
Mehul Chokshi Scam
January 2018

जनवरी 2018 पंजाब नैशनल बैंक – 14000 करोड़ घोटाला
नीरव मोदी मेहूल चौकसी – मामा भांजा की जोड़ी जो आज भी ताड़ीपार है हाँ वही माना जिसे प्रधानमंत्री भी मेहूल भाई संबोधित करते हुए कई सोशल पर दिख जाएंगे और वही भांजा जो कभी एक इंटरनेशनल प्रोग्राम की तस्वीर मे भी दिख जाएगा जिसमें मोदी जी भी चित्र में दिखते है

ILFS SCAM, June 2018

जून 2018, 95000 करोड़ IL&FS घोटाला,
अचानक चेयरमैन सहाब बीमारी का हवाला दे पद त्याग देते है जिसके बाद ये घोटाला सामने आया

DHFL Scam, January 2019

जनवरी 2019, Dhfl घोटाला 85000 करोड़, जिसके चेयरमैन Wadhawan बंधुओं ने भाजपा को कई हजार करोड़ का चंदा दिया ऐसा cobrapost न्यूज का दावा है

PMC Bank Scam, September 2019

सितंबर 2019 PMC बैंक घोटाला 6500 करोड़,, जिसमें PMCBANK के डायरेक्टर ने जनता के पैसे को HDIL नामक कंपनी को दिया, वही HDIL कंपनी जिसे भाजपा के करीबी Wadhawan बंधुओं की मानी जाती है

Yes Bank Scam, March 2020

मार्च 2020 yes बैंक घोटाला 1 लाख करोड़
इस बैंक के चेयरमैन ने भी हजारो करोड़ जनता के पैसे कहा जाता है बाहर देश पहुंचाये, Wadhwan बंधुओं को दिए जिन्होंने भाजपा को मोटा चंदा दिया कहा जाता है

Laxmi Vilas Bank Scam, September 2020

सितंबर 2020 लक्ष्मी विलास बैंक घोटाला 35000 करोड़, इस बैंक ने भी जनता का गाढ़ी कमाई का पैसा उन उद्योगपति को दीया जिनका संबंध भाजपा से करीब माना जाता है और उन्हीं उद्योगपतियों ने पैसे नहीं लौटाए

ये पिक्चर तो सिर्फ बड़े निर्णयों और घोटालों की है जो जनता को बर्बादी की परिस्थित पहुचाने मे काफी है हालाकि अनेक और घोटाले जैसे Rotomac Scam 5000 करोड़ , Bhushan Steel scam 55000 करोड़, 20-25 और हे जिन्हें तो मीडिया ने कवर ही नहीं किया

भारत के पैसो की हेरा फेरी की बातों के अलावा अन्य भी मामलात हे जो उपरोक्त गठित टीम अपने आकाओं के लिए करती रहती है , जैसे देश मे सत्ता बनाए रखने के लिए मीडिया, सोशल मीडिया कंपनियों से सम्बंध स्थापित कर ईन पर केसे प्रोग्राम, ख़बरें, इतिहास को तोड़ मरोड़ कर, पेश करना है, जिससे भोली भाली जनता का दिमाग भटकाया जाए, बाकी अन्य राजनीतिक काम जेसे सरकारों मे हॉर्स trading कर सर्कार बनाना, कानून मे फेरबदल कर आकाओं को सस्ते मे देश की खनिज सम्पदा, धंधे करने के लाइसेंस केसे मुहैया कराने है, कानून के जरिए विरोधी दालों की आवाजों को दबाना इत्यादि शामिल है

लेकिन यह टीम और इनके 4 आका बिल्कुल प्लानिंग से काम कर रहे है इसमे कोई संदेह नहीं

Yash Singh
Guest Columnist
Economist & Investment Banker
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RCEP-Biden Rising – China Gaining!

Yes it seems correct as today when Joe Biden has not been elected formally, China have been able to solidify the world’s largest regional economic & financial deal among 15 countries of the world, The RCEP- Regional Comprehensive Economic Partnership, to be sighed between
Ten members of ASEAN
Brunei
Cambodia
Indonesia
Laos
Malaysia
Myanmar
Philippines
Singapore
Thailand
Vietnam
Three additional East Asian members of ASEAN Plus Three
China
Japan
South Korea
Two additional Oceanian members of ASEAN Plus Six
Australia
New Zealand

Here most important country left out is India. The reason for India not signing seems India safeguarding it’s internal industries & production & it’s government still wants to enjoy high tariffs & taxes it imposes on imports.
Though signing RCEP would have been better in the consumer point of view with increasing competition, low prices, varieties of products availability especially in Automobiles sectors but higher cost of production & high prices on products would have adversely affected the Indian industry. This would have accelerated innovation & reduced the production cost can have proved positive effect of signing RCEP by such an important economy such as India.

As per China is concerned, making RCEP into reality right now just after informal announcements of Biden’s victory shows the gain of Chinese momentum which seems going to accelerate in the coming future.
Though US also going to launch Trans Pacific Partnership – TPP & all this countries especially India may join TPP to boost trade with USA.

Bureau – Finance & Economy
Voice of the People International

African debt to China

A major drain on the poorest countries’
Over the past two decades, China has emerged as the biggest bilateral lender to Africa, transferring nearly $150bn to governments and state-owned companies as it sought to secure commodity supplies and develop its global network of infrastructure projects, the Belt and Road Initiative. -Financial Times

Indian financial scams, Public Dissatisfaction & Gloomy future of Modi Govt.

With the advent of the #ModiGovt in 2014 rise in the financial scams, Non Performing Assets NPA’S of Public sector banks, falling GDP, financial turmoil, Economic crisis, all were visible on rational statistics & data’s even before Covid Lockdown in #India. Financial plunders by private entities viz. DHFL, ILFS, PMCBANK, HDIL, YESBANK have given big blow to entire financial systems in #India. The rise in NPA’S in Public sector banks are also the outcome of loans & advances non repayment by private business houses. Moreover million dollar frauds by fraudsters tycoons in India viz. Vijay Malaya, Nirav Modi, Mehul Chokshi, Rotomac etc. have added more losses to the public money. In simple words, on one side this fraudsters, business houses, politically savvy businessman’s are creating losses or say looting public money,, but on the other side the this looted public is crying for their hard earned money & seems dissatisfied by the present financial situation handled by the central government & its machineries.
People has question that How centre govt easily accepted public losses but not easily accepting the cries of the millions of Public whose money is looted. If ModiGovt really worked to bring justice to the public then till today Indian public would have not shouted cried to get their money in cases like PMCBANK, DHFL etc. The last bailout was of YESBANK that too was funded by Public money whereas if govt. have really worked properly entire hijacked funds by defaulting promoters would have been recovered. So in entire financial turmoil ModiGovt gets 0 zero in working out to safeguard public money. This grown turmoil of public sentiment if not restored by #ModiGovt then future of this government seems gloomy in near future.

Zambia – Africa’s 1st Covid regime defaulter

President Edgar Lungu’s government is seeking the suspension of debt service payments for a period of six months from holders of $3bn of its international bonds © REUTERS

President Edgar Lungu’s government said on Tuesday that it was seeking “the suspension of debt service payments for a period of six months” from holders of its $3bn worth of international bonds, beginning in October.
Zambia has asked investors in its US dollar bonds to accept delays in their interest payments into next year, in what would be the first African debt default on private creditors since the pandemic.

Zambia had already secured the temporary suspension of payments to some official creditors until the end of the year, under a special scheme for relief in the pandemic.

Kenya, South Africa, Nigeria to regulate Bitcoin

Cryptocurrency startups welcomed regulation.

“It is important that the space is regulated and properly guided by the financial authorities to ensure confidence and protection of the consumer,” says Stephany Zoo, head of marketing at Bitpesa, a Kenya-based exchange. “When you do that, it feeds back into the ecosystem and encourages innovation around this specific technology which there’s always been so much grey area around.”

The theme of regulation as a building block for fostering consumer confidence is a recurring one among cryptocurrency startup founders and insiders. By setting out requirements for cryptocurrency startups to operate, the belief is regulation will ultimately make it easier for interested customers to identify credible and licensed exchanges.
Another major potential benefit of regulation could come in form of formalizing relationships between banks and cryptocurrency exchanges which will then ease the process of changing fiat currencies into cryptocurrencies and vice versa. “Once governments regulate better, there’s more chance of opening up integration with traditional financial infrastructure and there would be more mass adoption as well,” Zoo says.

But as is typical with regulation, there are potential pitfalls as recent history in some of Africa’s key tech markets show. For example, capital requirements for fintech startups in Nigeria are believed to pose barriers to entry. And in Lagos, Africa’s largest city, regulators ultimately banned motorcycle-hailing startups earlier this year after controversial attempts to regulate their operations. ”What we’d like to see is a phased approach,” Reitz says. “It can be very easy for regulators to want to regulate the entire industry from the onset but it could stifle innovation.”

While the outlook of regulation across the continent broadly remains unclear, there’s a growing belief that Nigeria and South Africa’s stances could trigger similar discussions across board. And Kenya could yet prove an example of that, Satchu predicts. “Given the recent announcements and developments, it’s increasingly going to be difficult for Kenya to maintain its hardcore stance,” he tells Quartz Africa.

As it turns out, the waiting game by Kenyan authorities may be coming at a cost of being at the forefront of the industry given the scale of local adoption: Kenya is the highest ranked African nation on the 2020 Global Crypto Adoption Index.

“The challenge stakeholders will be concerned about is that the advantage is being eroded the longer Kenya does not take an appropriate stance towards this market,” Satchu tells Quartz Africa. “This is fertile ground to look to develop a leading edge cryptocurrency market on the continent—the question is if the regulators want that.”

Extracts from
Yomi Kazeem
Reporter, Quartz Africa

Americans buying military gears

Since last year, online purchases have driven a 20-fold jump in sales of goods like the $220 CM-6M gas mask — resistant to bean-bag rounds — for Mira Safety of Austin, Texas.
A shift became apparent with this spring’s Black Lives Matter protests and bitterly resented pandemic lockdowns. Now the gear is everywhere, from camouflage-clad antifa supporters to right-wing extremists who appeared at Michigan’s capitol even after men were arrested in a plot to kidnap Governor Gretchen Whitmer.
It doesn’t matter who gets elected,” founder Roman Zrazhevskiy said of his new customers. “They think that no matter who wins, Biden or Trump, there are going to be people who are upset about the result.”
“It’s evidence of what many people have been expressing concern about for the last six months — the stress associated with the pandemic, a frustration or anger about various government mitigation efforts and a belief that those efforts are infringing on their individual liberties,” said Elizabeth Neumann, a former assistant secretary for threat prevention at the Department of Homeland Security.
We’ve seen a big uptick coming out of New York, New Jersey, Illinois — not just those states but Chicago, Manhattan, Queens and San Francisco,” he said. “We never did business with folks from San Francisco.”

His biggest seller is a $220 body-armor plate meant to withstand bullets fired from an AK-47.
Before the pandemic, 5.11 Tactical, based in Irvine, California, was opening two stores a month, drawing customers for “Always Be Ready” events akin to cooking demonstrations at Williams Sonoma. Amid racks of military-style boots, pants and vests, the classes taught self defense, trauma care and “everyday/concealed carry.”

Unexpectedly high consumer sales maintained growth during lockdowns, according to Compass Diversified Holdings Inc., a Westport, Connecticut-based company that owns 5.11 Tactical among a portfolio that also includes Ergobaby infant carriers.

Same-store sales including e-commerce rose 10.5% in the second quarter after 7.5% growth in the first quarter, Chief Operating Officer Pat Maciariello told analysts on a conference call in July.

Excerpts from Bloomberg Quint

De-Centralize Global Manufacturing : Shifting from China to India

World has made China the global manufacturing hub. Most of the global corporations have their manufacturing units in China. In the past China attracted the global investments by showcasing their easy availability of the factors of production viz. land, labour,trade services. But today the real negative face of communist China has outgrown the positive sides it shown to the world. Its power centric idealogy not only overpowering the democratic setup of global society but also wants to create an envioronment of manufacturing monopoly and this is not good for the global future. India compared to China stands taller in democratic setup, easy availablity of land, labour, capital, trade services.

Though world may have not approached India in the past for manufacturing setup, but now its not only the necessecity but in actual terms India seems much better in not only manufacturing but also in presence of vast market that can service entire Asia and other continents with ease.The global open economic envioronment, enhanced trade services, developed IT infrastructure, quality and cheap labour etc, all goes in the plus positive points in favour of India.